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मिर्जापुर में गंगा-रामगंगा का रौद्र रूप, रामगंगा खतरे के निशान से ऊपर; दर्जनों गांव टापू बने

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हजारों बीघा फसलें पानी में डूबीं, स्कूल और संपर्क मार्ग प्रभावित; जहरीले कीड़े-मकौड़ों का भी बढ़ा खतरा

स्टेट हाईवे पर दो फीट तक पानी, बाइक समेत राहगीरों को बैलगाड़ी से पार करा रहे लोग; प्रति बाइक 100 रुपये वसूले जा रहे

प्रदीप रघुवंशी

मिर्जापुर। ब्लॉक क्षेत्र में गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। रामगंगा नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है, जबकि गंगा नदी भी खतरे के निशान के बेहद करीब बह रही है। बाढ़ के पानी से खादर क्षेत्र समेत करीब दो दर्जन गांव प्रभावित हैं। कई गांवों के आसपास पानी भर जाने से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है और लोगों में दहशत का माहौल है।

रामगंगा का पानी मौजमपुर, हरिहरपुर, ककोड़ा, कुंडरी, सिठौली, बीघापुर, पहरुआ, अतरी, टेढ़ा, मिर्जापुर, जरियनपुर, कुतलुपुर, गुलड़िया, आलमगंज, सिंगाहपुर और तारापुर आदि गांवों के नजदीक पहुंच गया है। हजारों बीघा फसलें पानी से घिरी हुई हैं। खेतों में खड़ी धान, तिल, बाजरा और तुलसी की फसलें कई दिनों से पानी में डूबी हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जल्द पानी नहीं उतरा तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।

बाढ़ के चलते कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर सड़कें कट गई हैं। नगला बसौला मार्ग भी बाढ़ के पानी से कट गया है। ऐसे में ग्रामीणों को आवागमन के लिए स्टीमर और बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है।


स्कूलों के आसपास भी भरा बाढ़ का पानी

बाढ़ का असर क्षेत्र के कई सरकारी प्राथमिक विद्यालयों पर भी पड़ा है। पैलानी उत्तर प्रथम, दहलिया, ककोड़ा, कुंडरी द्वितीय, दरियागंज, मानशंगला, सादिकपुर और पहरुआ समेत कई गांवों के स्कूलों के आसपास पानी भर गया है। हालांकि अभी शिक्षण कार्य जारी है।

खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद कुशवाह के मुताबिक, नदियों का पानी स्कूलों के रास्ते और परिसर को प्रभावित कर रहा है, लेकिन फिलहाल शिक्षण कार्य सुचारु रूप से चल रहा है। यदि पानी स्कूलों के अंदर पहुंचता है तो पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

उधर, बाढ़ के पानी के कारण तटवर्ती इलाकों में मवेशियों के लिए चारे की समस्या भी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार पानी भरा होने से पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है। वहीं जहरीले कीड़े-मकौड़े भी पानी से बचने के लिए घरों की तरफ पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में डर बना हुआ है।

स्टेट हाईवे पर पानी, बैलगाड़ी बनी सहारा

गंगा में आई बाढ़ का पानी जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाईवे पर कई दिनों से बह रहा है। करीब 200 मीटर के हिस्से में लगभग दो फीट तक पानी होने के कारण छोटे वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में राहगीर जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।

बाढ़ के बीच कुछ लोगों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है। मौके पर मौजूद बैलगाड़ी चालक जरूरतमंद राहगीरों के साथ उनकी बाइक को भी बैलगाड़ी पर लादकर पानी के पार करा रहे हैं। इसके लिए प्रति बाइक 100 रुपये लिए जा रहे हैं। मजबूरी में लोग पैसे देकर हाईवे के इस जलमग्न हिस्से को पार करने को मजबूर हैं।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष की गुरुवार सुबह आठ बजे की रिपोर्ट के मुताबिक भैंसार ढाईघाट तटबंध पर गंगा का जलस्तर 143.48 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 143.65 मीटर से 0.17 मीटर नीचे है। वहीं डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर 137.63 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 0.33 मीटर ऊपर बताया गया है।

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों को डर है कि यदि नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो फसलों के साथ-साथ आवागमन और जनजीवन पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

 


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